मंगलवार, 27 नवंबर 2007

व्यंग्य

अब तक का सबसे बड़ा खुलासा

इधर देखा- अब तक का सबसे बड़ा खुलासा। उधर देखा- अब तक का सबसे खुलासा। हर कहीं खुलासे पर खुलासा हो रहा था। यह सब देख हमसे रहा नहीं जा रहा है। सोच रहे हैं हम भी एक खुलासा करें, जो इन सब खुलासों से निश्चित तौर पर बड़ा होगा। सो, यह खाकसार भी करने जा रहा है- अब तक का सबसे बड़ा खुलासा। लेकिन साहब यहां आपसे एक गुजारिश है कि कोई भी खुलासा तभी खुलासा लगता है, जब उसे चिल्ला-चिल्लाकर सुनाया जाए। अब प्रिंट मीडिया के जरिए यह संभव नहीं, सो, यहां से आगे आप खुद ही चिल्ला-चिल्लाकर पढ़ने का कष्ट करें। तो साहब, तैयार हो जाइए, क्योंकि ये खाकसार करने जा रहा है अब तक का सबसे बड़ा खुलासा-"पप्पू का उत्पीड़न"जी हां, देश की राजधानी दिल्ली में छह साल के मासूम पप्पू का किया गया उत्पीड़न। पप्पू का उत्पीड़न करने वाला कोई और नहीं, बल्कि उसी के घर वाले थे। जी हां, पप्पू के ही घर वाले। उसी के मम्मी-पापा और उसी की दीदी और बड़ा भाई। जब पप्पू नेपकिन या चड्डी पहनने से इंकार करता, तब ये लोग उसे डराते और करते उसका उत्पीड़न। पप्पू के साथ उसी के घर वाले उत्पीड़न का ये खिलौना खेल पिछले डेढ़ साल से खेल रहे थे, लेकिन अब हो गया है इनके इस खिनौने खेल का पर्दाफाश। खाकसार के खुलासे के बाद सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है।असल में, होता ये था कि जब पप्पू नेपकिन या चड्डी पहनने से आनाकानी करता था, तो ये लोग इशारा कर उसे टीवी ऑन करने की धमकी देते थे। नादान पप्पू समझता था कि टीवी के अंदर के कलाकार उसे देख रहे हैं और जब वह बिना नेपकिन या चड्डी का दिखेगा, तो वो शेम...शेम कह कर उसका मजाक बनाएंगे और वो बेचारा मजाक नहीं बनना चाहता था।बस, नादान पप्पू की इसी नादानी को उसके घर वालों ने अपना हथियार बना लिया और हर बार उसे डराने के लिए करते इसका इस्तेमाल। लेकिन कानून की नजर में ये उत्पीड़न है। ठीक वैसे ही जैसे कोई कनपट्टी पर पिस्तौल रख अपना काम निकलवा लेता है। पप्पू सहमा हुआ है, कुछ भी बोलने की स्थिति में नहीं है, लेकिन उसकी आंखों में उसके उत्पीड़न की कहानी आसानी से पढ़ी जा सकती है।इस खुलासा ने सदा आपकी सहायता के लिए, का दावा करने वाली पुलिस की भी पोल खोल दी है। पुलिस अपना पल्ला झांड़ते कहती है कि पप्पू ने अपनी शिकायत दर्ज नहीं कराई। लेकिन सवाल ये है कि छह साल का पप्पू क्या जाने कानून, उसे क्या मालूम कहां होती है शिकायत दर्ज....। जब पोलियो वाले घर-घर पोलियो ड्राप्स पिलाने आ सकते हैं, तब पुलिस को भी ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए थी। उसे भी घर-घर जाकर मासूम बच्चों से उनका हालचाल व शिकायत पूछनी चाहिए। इस खुलासे के बाद बाल कल्याण मंत्रालय पर भी उंगुली उठ रही है। विभाग के अधिकारी इस मामले में कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं। बहरहाल।तो साहब, यही था इस खाकसार का अब तक का सबसे बड़ा खुलासा। आपका यह खुलासा कैसा लगा, आप फलां नम्बर पर एसएमएस कर सकते हैं, क्योंकि उसी से इस खाकसार की इस सप्ताह की रेटिंग तय होगी।

- ललित पांडे

2 टिप्‍पणियां:

देवांशु वत्स ने कहा…

डियर ललित,

व्यंग्य अच्छा लगा। आपने अच्छा मुद्दा उठाया है।

Amit K Sagar ने कहा…

वाह, सच में मजा आ गया श्रीमान जी. बहुत ही सुन्दर तरीके से आपने लिखा है. जारी रहें. शुभकामनाएं.
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समाज और देश के ज्वलंत मुद्दों पर अपनी राय रखने के लिए व बहस में शामिल होने के लिए भाग लीजिये व लेखक / लेखिका के रूप में ज्वाइन [उल्टा तीर] - होने वाली एक क्रान्ति!

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डाक्टर साहब ने नाड़ी टटोली। फिर अपना आला निकाला और धड़कन की रफ्तार नापने लगे। अपनी डाक्टरी गणित से कुछ दिमागी गुणा-भाग किया। उसके बाद वह बोले- भाई साहब, अब कुछ नहीं हो सकता। पिताजी सकते में आ गए। हड़बड़ाते हुए बोले- डाक्टर साहब बात क्या है? डाक्टर साहब बोले- अब वाकई बहुत देर हो गई है...आपके बेटे को लिखास रोग हो गया है...।