गुरुवार, 29 नवंबर 2007

व्यंग्य

राहुल गांधी कांग्रेस में आ गए!

पिछले दिनों हर कांग्रेसी के चेहरे पर मुस्कान थी, तो मन बल्लियां उछल रहा था। वह झूम रहे थे और कह रहे थे कि राहुल भैया कांग्रेस संगठन में आ गए। लेकिन हम हतप्रभ थे, क्योंकि हम नहीं समझ पा रहे थे कि राहुल भैया कांग्रेस में तो आ गए, पर वह आए कहां से?
क्या वह भाजपा में थे, बसपा में थे, सपा में थे या किसी और पार्टी में थे, जो वहां से कांग्रेस में आ गए। वो तो कांग्रेस में ही थे, कांग्रेस से बाहर थोड़े ही थे, तो फिर यह कहकर कि वह कांग्रेस में आ गए, जश्न क्यों...?
ऐसे तो कल कहा जाएगा कि प्रियंका गांधी कांग्रेस में आ गईं हैं। अरे भैया, वह तो कांग्रेस में थीं, तो कहां से आ गईं।
अजीब-अजीब किस्म के कांग्रेसी हैं। कोई कहीं से आया नहीं, वहीं का वहीं है, फिर भी खुशियां मनाते हैं, झूमते-नाचते-गाते हैं।
बात तो तब होगी, जब राहुल गांधी कांग्रेस से भाजपा या किसी अन्य पार्टी में आ जाएं या फिर राहुल भैया केंद्र में आ जाएं। प्रधानमंत्री या मंत्री बनें। बात तो तभी होगी ना!
केंद्र में आने के लिए मशक्कत करनी पड़ती है। पहले राज्यों में आना होता है, तब कोई केंद्र में आता है। उत्तराखंड में आए नहीं, उत्तरप्रदेश में आए नहीं, पंजाब में आए नहीं, ऐसे में अब देखना है कि गुजरात में आते हैं कि नहीं, हिमाचल में आते हैं कि नहीं या फिर राजस्थान, मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ में आते हैं कि नहीं।
तो भैया आप समझ रहे हैं ना कि केंद्र में आना, कांग्रेस में आने से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। राहुल भैया केंद्र में आएं, तो कोई बात होगी। होगी की नहीं..? तब कांग्रेसी झूमें-नाचें तो ठीक लगेगा। बिन बात के नाचना-गाना ठीक थोड़े ही है।
खैर, इस खाकसार का जब एक ऐसे कांग्रेसी से सामना हुआ, जो चिल्ला-चिल्ला कर कह रहा था कि राहुल भैया कांग्रेस में आ गए, तो उनके इस बेतुके जश्न पर मन का गुस्सा सवाल बन कर उसके सामने फूट पड़ा- राहुल भैया कांग्रेस में आ गए, ये कोई बात हुई! बात तो तब होगी जब वह केंद्र में आएं?
वह जवाब देते बोले- उन्हें केंद्र में आने की जरूरत ही क्या है। यहां हम हैं ना!
उनके मुंह से इस तरह का जवाब सुन हमें आश्चर्य हुआ, हम पूछ बैठे- क्यों?
वह बोले- राहुल भैया युवा हैं, कुछ करना चाहते हैं। केंद्र में कुछ थोड़े ही होता है, जो कुछ होता है कांग्रेस में होता है। अब चुनाव होंगे, जनता को केंद्र को कोई जवाब थोड़े देना होता है, जवाब तो कांग्रेस देगी। सो, काम कांग्रेस में है, केंद्र में नहीं। केंद्र में तो हम हैं ही!
उस कांग्रेसी के इस तरह के जवाब सुन हमें घनघोर आश्चर्य हुआ। हमने उन्हें और कुरेदने की अपनी कोशिश के तहत पूछ लिया- यदि वह खुद केंद्र में आना चाहें तो?
वह तपाक से बोले- हम उनका स्वागत करेंगे, लेकिन ये विपक्ष वाले तब भी कोई न कोई अड़ंगा जरूर डालने की कोशिश करेंगे और उन्हें आने ही नहीं देंगे। आखिर में राहुल भैया को अपने अंतःआत्मा की आवाज सुननी पड़ेगी। सोनिया मैया के साथ भी तो ऐसा ही हुआ था। ऐसे में वह इधर (केंद्र में) आने की कोशिश न करें, तो ही ठीक। वैसे भी यहां हम हैं ना!बहरहाल, उस कांग्रेसी के इतना समझाने के बाद हम समझ गए कि यह पूरा खेल उनके जैसे कांग्रेसियों का ही रचाया है, जिस पर राहुल को एक मोहरे की तरह चलना भर है।

- ललित पांडे

मंगलवार, 27 नवंबर 2007

व्यंग्य

अब तक का सबसे बड़ा खुलासा

इधर देखा- अब तक का सबसे बड़ा खुलासा। उधर देखा- अब तक का सबसे खुलासा। हर कहीं खुलासे पर खुलासा हो रहा था। यह सब देख हमसे रहा नहीं जा रहा है। सोच रहे हैं हम भी एक खुलासा करें, जो इन सब खुलासों से निश्चित तौर पर बड़ा होगा। सो, यह खाकसार भी करने जा रहा है- अब तक का सबसे बड़ा खुलासा। लेकिन साहब यहां आपसे एक गुजारिश है कि कोई भी खुलासा तभी खुलासा लगता है, जब उसे चिल्ला-चिल्लाकर सुनाया जाए। अब प्रिंट मीडिया के जरिए यह संभव नहीं, सो, यहां से आगे आप खुद ही चिल्ला-चिल्लाकर पढ़ने का कष्ट करें। तो साहब, तैयार हो जाइए, क्योंकि ये खाकसार करने जा रहा है अब तक का सबसे बड़ा खुलासा-"पप्पू का उत्पीड़न"जी हां, देश की राजधानी दिल्ली में छह साल के मासूम पप्पू का किया गया उत्पीड़न। पप्पू का उत्पीड़न करने वाला कोई और नहीं, बल्कि उसी के घर वाले थे। जी हां, पप्पू के ही घर वाले। उसी के मम्मी-पापा और उसी की दीदी और बड़ा भाई। जब पप्पू नेपकिन या चड्डी पहनने से इंकार करता, तब ये लोग उसे डराते और करते उसका उत्पीड़न। पप्पू के साथ उसी के घर वाले उत्पीड़न का ये खिलौना खेल पिछले डेढ़ साल से खेल रहे थे, लेकिन अब हो गया है इनके इस खिनौने खेल का पर्दाफाश। खाकसार के खुलासे के बाद सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है।असल में, होता ये था कि जब पप्पू नेपकिन या चड्डी पहनने से आनाकानी करता था, तो ये लोग इशारा कर उसे टीवी ऑन करने की धमकी देते थे। नादान पप्पू समझता था कि टीवी के अंदर के कलाकार उसे देख रहे हैं और जब वह बिना नेपकिन या चड्डी का दिखेगा, तो वो शेम...शेम कह कर उसका मजाक बनाएंगे और वो बेचारा मजाक नहीं बनना चाहता था।बस, नादान पप्पू की इसी नादानी को उसके घर वालों ने अपना हथियार बना लिया और हर बार उसे डराने के लिए करते इसका इस्तेमाल। लेकिन कानून की नजर में ये उत्पीड़न है। ठीक वैसे ही जैसे कोई कनपट्टी पर पिस्तौल रख अपना काम निकलवा लेता है। पप्पू सहमा हुआ है, कुछ भी बोलने की स्थिति में नहीं है, लेकिन उसकी आंखों में उसके उत्पीड़न की कहानी आसानी से पढ़ी जा सकती है।इस खुलासा ने सदा आपकी सहायता के लिए, का दावा करने वाली पुलिस की भी पोल खोल दी है। पुलिस अपना पल्ला झांड़ते कहती है कि पप्पू ने अपनी शिकायत दर्ज नहीं कराई। लेकिन सवाल ये है कि छह साल का पप्पू क्या जाने कानून, उसे क्या मालूम कहां होती है शिकायत दर्ज....। जब पोलियो वाले घर-घर पोलियो ड्राप्स पिलाने आ सकते हैं, तब पुलिस को भी ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए थी। उसे भी घर-घर जाकर मासूम बच्चों से उनका हालचाल व शिकायत पूछनी चाहिए। इस खुलासे के बाद बाल कल्याण मंत्रालय पर भी उंगुली उठ रही है। विभाग के अधिकारी इस मामले में कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं। बहरहाल।तो साहब, यही था इस खाकसार का अब तक का सबसे बड़ा खुलासा। आपका यह खुलासा कैसा लगा, आप फलां नम्बर पर एसएमएस कर सकते हैं, क्योंकि उसी से इस खाकसार की इस सप्ताह की रेटिंग तय होगी।

- ललित पांडे

पुराना, मगर काम का माल

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डाक्टर साहब ने नाड़ी टटोली। फिर अपना आला निकाला और धड़कन की रफ्तार नापने लगे। अपनी डाक्टरी गणित से कुछ दिमागी गुणा-भाग किया। उसके बाद वह बोले- भाई साहब, अब कुछ नहीं हो सकता। पिताजी सकते में आ गए। हड़बड़ाते हुए बोले- डाक्टर साहब बात क्या है? डाक्टर साहब बोले- अब वाकई बहुत देर हो गई है...आपके बेटे को लिखास रोग हो गया है...।